वित्तीय साक्षरता अभियान- आईआईएमएन

वित्तीय साक्षरता अभियान (वीआईएसएकेए)- आईआईएम नागपुर

आईआईएम नागपुर ने अभियान के हिस्से के रूप में डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाने के लिए जागरूकता फैलाने का अपना पहला कदम उठाया है – मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा वित्तीय साक्षरता अभियान।

योजना

उम्मीद-आईआईएम के ‘कम्युनिटी आउटरीच क्लब’ने डिजिटल भुगतान प्रणाली को लोकप्रिय बनाने की महती जिम्मेदारी को जनजागरुकता फैलाने की दृष्टि से हाथों में लिया है. ‘उम्मीद’विश्वास करता है कि इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मौखिक प्रचार, सर्वाधिक सशक्त माध्यम है। इसीलिए इस दिशा में पहला, छोटा कदम हमने भी उठा लिया है। हम यह भी विश्वास करते हैं कि इस अभियान की शुरुआत साधारण जनसमुदाय के बीच से की जानी चाहिए-जैसे चाय की दुकानें और फास्टफूड के सेंटर। ऐसे स्थान कॉलेज परिसरों के आसपास बहुतायत में हैं।

हम दवा की दुकानों को भी अपना लक्ष्य बना रहे हैं-जहां पर आमतौर पर डिजिटल की बजाय नगद भुगतान किया जाता है। स्थानीय दवा दुकानदारों को नगद के स्थान पर डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहित करना हमारे अभियान का मुख्य लक्ष्य होगा। इस अभियान के प्रति लोगों में जागृति लाने के लिए ‘उम्मीद’टीम का एक अन्य मुख्य बिंदु होगा धंतोली, धरमपेठ और सीताबर्डी के बाजार. यहां के व्यवसायियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली की आसान प्रक्रिया और इसके लाभों से अवगत कराया जाएगा.

यहां के व्यवसायियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली की आसान प्रक्रिया और इसके लाभों से अवगत कराया जाएगा. अपने मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के सहयोगियों के साथ मिलकर इस अभियान का प्रचार करने का फायदा यह भी होगा कि इसकी जानकारी उनके परिवार, मित्र समुदायों को भी आसानी से मिल सकेगी। आईआईएम, नागपुर की टीम ने यह शुरुआत कर दी है और विद्यार्थियों में इसके प्रति काफी उत्सुकता नजर आ रही है। उन्होंने इस अभियान को अपने परिजन और मित्र परिवार में पहुंचाने की शपथ भी ली है।

आईआईएम, नागपुर का प्रशासनिक विभाग, जो अब तक भुगतान के लिए डिमांड ड्राफ्ट स्वीकार करता है, उसने आने वाले सत्र से ऑनलाईन भुगतान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है ताकि कैंपस पूरी तरह से डिजिटल हो सके। इसी क्रम में हमा भोजनालय के ठेकेदार ने भी भुगतान को ऑनलाईन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे भोजनालय का मासिक भुगतान डिजिटल हो सकेगा। इसमें नाइट कैंटीन का भुगतान भी शामिल है। इस अभियान को और आगे बढ़ाने के लिए हमारे अपने धोबीघर (लॉंड्री शॉप) में भी भुगतान को नगदरहित करने का फैसला किया है। इसके परिणाम भी उत्साहजनक मिल रहे हैं।

कठिनाइयां

टीम को इस दौरान कुछ कठिनाइयां भी आ रही हैं जिनमें प्रमुख है-स्थानीय छोेटे व्यापारियों और ठेले वालों की अनिच्छा. उनका भ्रम है कि डिजिटल माध्यम से पैसा लेने पर उनके रोजमर्रा की कमाई पर बुरा असर पड़ेगा. उनका यह भी अनुमान है कि ज्यादातर लोग नगदरहित लेन-देन नहीं करते हैं-इसलिए उन्हें इस माध्यम को अपनाने में परेशानी होगी. हमारी टीम ने एसे लोगों को समझा-बुझाकर प्रोत्साहित किया है कि वे इस प्रक्रिया को अपनाएं, अपनी दुकान पर इस बात को प्रचारित करें कि उनके पास नगदरहित भुगतान की सुविधा उपलब्ध है. धीरे-धीरे अपने ग्राहकों को इसके लिए राजी करें।

कुछ लोग इस विचारधारा वाले भी हैं कि डिजिटल भुगतान की यह प्रणाली नागपुर जैसे मध्यम श्रेणी के शहरों में सफल नहीं हो सकती। छोटे व्यापारियों की सामान्य समझ यह भी है कि बड़े शहरों में, जहां एक बड़ी संख्या में युवा रहते हैं-वहीं यह योजना काम कर सकती है। उनका यह भी मानना है मध्यम उम्र के और बुजुर्ग लोग यही मानते हैं कि छोटे दुकानदारों को डिजिटल के स्थान पर नगद भुगतान करना ज्यादा अच्छा होगा। एसे लोग डिजिटल भुगतान से स्वभावतः बचते हैं। हमारी टीम व्यापारियों के बीच फैली इस गलत धारणा को बदलने के लिए प्रयासरत है ताकि वे नगद लेने से बचें।

सुझाव

अपने अनुभवों और प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर ‘उम्मीद’टीम विश्वास करती है कि भारत सरकार की ओर से इस अभियान को प्रसारित करने के लिए एक व्यापक मार्केटिंग प्लान बनाया जाना चाहिए. विज्ञापनों के माध्यम से घर-परिवारों में सीधा संपर्क स्थापित हो सकेगा क्योंकि हमारे देश में बड़ी आबादी टेलीविजन देखती है। प्रचार का दूसरा माध्यम रेडियो भी हो सकता है। रेडियो भी बड़ी संख्या में लोग सुनते हैं।

सरकार बैंकों के जरिए उनके सभी बैंक उपभोक्ताओं को ‘रुपे कार्ड’दिलवा सकती है। इस उपाय की व्यवहारिकता बैंक अधिकारियों से बातचीत के बाद तलाशी जा सकती है।

भविष्य की कार्ययोजना

आईआईएम, नागपुर की‘उम्मीद’ टीम की योजना है कि इस अभियान के लिए जनजागरूकता अभियान 12 जनवरी के बाद भी जारी रखा जाए. इसे एकल अभियान बनाकर न छोड़ दिया जाए। हमें लगता है कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए लगातार प्रयास करते रहने होंगे तभी जनसाधारण में नगदरहित लेनदेन का विचार आत्मसात हो सकेगा।